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आदमी कितना मजबूर है

वो एक लम्हा

बात यही पर खत्म करें

Act of kindness

दिल बेदाग रखो

क्या खरीदने निकले हो

चाय और हम तुम

तुम हो तो

तुम्हारा यूँ उलझे रहना

सागर से शांत तुम

अच्छा ये बताओ

चलो आज फिर चाय पर मिलते है

जिन्दगी ठहर जा

रुबरु बैठ कर

एक बार फिर से अजनबी हो जाओ

कलाकार मरता नही

अगर मैं भूल भी जाऊं

बात यहीँ पर खत्म करें

सारे जहाँ से अच्छा

फुर्सत के पल

रिश्ते टूट जाते है